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The House Behind The Hill – पहाड़ी के पीछे वाले घर का रहस्य

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By Author: Divant
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शहर से कुछ दूर एक छोटी-सी पहाड़ी थी।

पहाड़ी के पीछे एक पुराना घर बना हुआ था, जिसे स्थानीय लोग सफेद मकान कहते थे।

घर बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देता था, लेकिन पिछले दस वर्षों से वहाँ कोई नहीं रहता था।

अजीब बात यह थी कि हर शाम उस घर की एक खिड़की में रोशनी जलती थी।

बिजली का कनेक्शन कट चुका था।

फिर भी रोशनी रोज़ एक ही समय पर दिखाई देती थी।

कबीर का फैसला

कबीर एक फोटोग्राफर था।

उसे पुराने और सुनसान स्थानों की तस्वीरें लेना ...
... पसंद था।

एक दिन उसने उस घर की तस्वीर लेने का फैसला किया।

शाम को वह कैमरा लेकर पहाड़ी पर पहुँचा।

घर की खिड़की में वही पीली रोशनी जल रही थी।

उसने कैमरा निकाला और तस्वीर खींची।

फ्लैश हुआ।

लेकिन तस्वीर देखते ही कबीर के चेहरे का रंग उड़ गया।

खिड़की में एक महिला खड़ी थी।

दूसरी तस्वीर

कबीर ने सोचा कि शायद कोई घर में रहता होगा।

उसने दूसरी तस्वीर खींची।

इस बार खिड़की खाली थी।

लेकिन घर के मुख्य दरवाज़े के पास एक आदमी खड़ा दिखाई दिया।

उसने तीसरी तस्वीर ली।

अब आदमी गायब था।

उसकी जगह...

एक छोटी लड़की खड़ी थी।

कबीर ने कैमरा नीचे कर दिया।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि तस्वीरों में लोग कहाँ से आ रहे थे।

घर के अंदर

अगले दिन वह दोबारा वहाँ गया।

मुख्य दरवाज़ा खुला था।

अंदर धूल और पुराने फर्नीचर के अलावा कुछ नहीं था।

दीवार पर कई तस्वीरें लगी थीं।

सभी तस्वीरें उसी घर की थीं।

लेकिन हर तस्वीर में एक ही महिला दिखाई दे रही थी।

कभी खिड़की पर।

कभी सीढ़ियों पर।

कभी दरवाज़े के पास।

कबीर ने आखिरी तस्वीर को ध्यान से देखा।

उसमें महिला कैमरे की तरफ देख रही थी।

और उसके नीचे तारीख़ लिखी थी—

आज की तारीख़।

बंद कमरा

घर की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा बंद था।

दरवाज़े पर कोई ताला नहीं था।

कबीर ने उसे खोलने की कोशिश की।

दरवाज़ा नहीं खुला।

अंदर से किसी बच्चे के रोने की आवाज़ आई।

कबीर पीछे हट गया।

कुछ सेकंड बाद आवाज़ बंद हो गई।

फिर अंदर से एक महिला की आवाज़ आई—

"तस्वीर मत लेना।"

कबीर ने डरकर कैमरा नीचे कर दिया।

पुराना अख़बार

नीचे उसे पुराने अख़बारों का एक बंडल मिला।

एक खबर देखकर वह रुक गया।

करीब बारह साल पहले उस घर में रहने वाली एक महिला और उसकी बेटी अचानक गायब हो गई थीं।

पुलिस को घर में कोई सुराग नहीं मिला।

लेकिन अख़बार में एक तस्वीर छपी थी।

कबीर ने तस्वीर देखी।

वही महिला।

वही लड़की।

और वही घर।

आखिरी तस्वीर

कबीर ने अपनी कैमरा स्क्रीन देखी।

उसमें एक नई तस्वीर मौजूद थी।

उसने वह तस्वीर ली ही नहीं थी।

तस्वीर में वही कमरा दिखाई दे रहा था जो ऊपर बंद था।

कमरे के बीच में महिला और उसकी बेटी खड़ी थीं।

दोनों कैमरे की तरफ देख रही थीं।

महिला ने हाथ से पीछे की तरफ इशारा किया था।

कबीर ने तस्वीर ज़ूम की।

पीछे दीवार पर कुछ लिखा था—

"हमें बाहर निकालो।"

सच क्या था?

कबीर ने दरवाज़ा तोड़ने का फैसला किया।

लकड़ी का दरवाज़ा कुछ ही वार में टूट गया।

कमरे के अंदर कोई नहीं था।

सिर्फ़ एक पुराना आईना था।

आईने के सामने खड़े होकर कबीर ने खुद को देखा।

लेकिन उसके पीछे...

वही महिला खड़ी थी।

कबीर तुरंत पलटा।

कोई नहीं था।

फिर आईने में देखा।

महिला अभी भी वहीं थी।

इस बार उसके साथ उसकी बेटी भी खड़ी थी।

आखिरी आवाज़

महिला ने आईने के अंदर से धीरे से कहा—

"तुमने हमारी तस्वीरें देख ली हैं।"

कबीर कुछ बोल नहीं पाया।

महिला ने आगे कहा—

"अब तुम्हारी तस्वीर भी बन चुकी है।"

आईना अचानक काला हो गया।

कबीर पीछे हट गया।

उसका कैमरा जमीन पर गिरा।

और उसी क्षण फ्लैश चमका।

अगले दिन

कबीर घर वापस नहीं लौटा।

उसकी कार पहाड़ी के नीचे मिली।

कैमरा अंदर था।

पुलिस ने तस्वीरें देखीं।

आखिरी तस्वीर में सफेद मकान दिखाई दे रहा था।

खिड़की में वही महिला और बच्ची खड़ी थीं।

उनके पीछे...

कबीर भी खड़ा था।

लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि तस्वीर के नीचे तारीख़ लिखी थी—

कल।

आज भी उस पहाड़ी के पास जाने वाले लोग कहते हैं कि शाम होते ही सफेद मकान की खिड़की में तीन परछाइयाँ दिखाई देती हैं।

एक महिला।

एक बच्ची।

और एक आदमी जिसके हाथ में कैमरा होता है।

कई लोग इस घटना को एक real horror story in hindi मानते हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन इसे सिर्फ़ अफवाह बताता है।

लेकिन पहाड़ी पर जाने वाले पुराने लोगों की एक चेतावनी आज भी कायम है—

"अगर खिड़की में रोशनी दिखाई दे, तो तस्वीर मत लेना।"

क्योंकि एक बार कैमरा किसी ऐसी चीज़ को देख ले...

तो शायद अगली तस्वीर में वह चीज़ अकेली नहीं होती।

ऐसी horror story in hindi पढ़ने के बाद आपको शायद किसी सुनसान घर की खिड़की में दिखाई देने वाली रोशनी भी सामान्य न लगे।

और इंटरनेट पर मौजूद कई unexpected stories की तरह इस कहानी का भी कोई पक्का अंत नहीं है।

क्योंकि सफेद मकान आज भी वहीं है।

और हर शाम...

उसकी एक खिड़की में रोशनी जलती है।

पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in

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