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The Last Passenger – आख़िरी मुसाफ़िर का रहस्य | Real Horror Story In Hindi
साल 2022 की सर्दियों की एक रात थी। दिल्ली से देहरादून जाने वाला पुराना हाईवे घने कोहरे में पूरी तरह गायब हो चुका था। सड़क पर गाड़ियों की संख्या बहुत कम थी और रात के लगभग 2:17 बज रहे थे।
रवि पिछले दस वर्षों से कैब चलाता था। उसने हज़ारों यात्रियों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाया था, लेकिन उस रात जो हुआ, उसने हमेशा के लिए रात में ड्राइव करना छोड़ दिया।
स्थानीय ड्राइवर उस हाईवे के एक मोड़ को "Silent Turn" कहते थे। उनका मानना था कि अगर कोई गाड़ी रात दो बजे के बाद ...
... उस मोड़ पर अकेली पहुँचे, तो उसे कभी-कभी ऐसा यात्री मिल जाता है जो इंसान नहीं होता।
अगर आपको real horror story in hindi पढ़ना पसंद है, तो यह कहानी अंत तक आपका ध्यान बाँधे रखेगी।
एक अनजान बुकिंग
रवि की मोबाइल स्क्रीन पर अचानक एक नई राइड आई।
Pickup Location: Silent Turn
Destination: Old Riverside Village
किराया सामान्य से लगभग पाँच गुना ज़्यादा था।
उसे थोड़ा अजीब लगा, क्योंकि उस इलाके में कोई रहता ही नहीं था।
फिर भी उसने राइड स्वीकार कर ली।
करीब दस मिनट बाद वह बताए गए स्थान पर पहुँच गया।
सड़क पूरी तरह सुनसान थी।
चारों तरफ़ सिर्फ़ घना कोहरा था।
तभी उसे सड़क के किनारे सफेद शॉल ओढ़े एक व्यक्ति खड़ा दिखाई दिया।
अजीब मुसाफ़िर
रवि ने गाड़ी रोकी।
वह व्यक्ति बिना कुछ बोले पीछे की सीट पर बैठ गया।
दरवाज़ा बंद हुआ।
लेकिन अजीब बात यह थी कि दरवाज़ा बंद होने की कोई आवाज़ नहीं आई।
रवि ने रियर व्यू मिरर में देखा।
मुसाफ़िर का चेहरा साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था।
कोहरा जैसे गाड़ी के अंदर भी फैल गया था।
कुछ मिनट बाद रवि ने पूछा—
"कहाँ तक जाना है?"
पीछे से धीमी आवाज़ आई—
"जहाँ मैं आख़िरी बार उतरा था..."
रवि को जवाब समझ नहीं आया।
बंद सड़क
GPS के अनुसार रास्ता सीधा था।
लेकिन अचानक मैप बंद हो गया।
मोबाइल में No Signal दिखने लगा।
गाड़ी की स्पीड अपने आप कम होने लगी।
ऐसा लग रहा था जैसे इंजन पर किसी ने भारी बोझ रख दिया हो।
तभी पीछे बैठे व्यक्ति ने कहा—
"बाईं तरफ़ से जाओ..."
रवि ने देखा—
बाईं तरफ़ कोई सड़क थी ही नहीं।
सिर्फ़ घना जंगल।
आईने का सच
रवि ने दोबारा शीशे में देखा।
इस बार पीछे की सीट खाली थी।
वह घबरा गया।
उसने तुरंत गाड़ी रोकी और पीछे मुड़कर देखा।
मुसाफ़िर वहीं बैठा था।
लेकिन आईने में वह दिखाई नहीं दे रहा था।
रवि के हाथ काँपने लगे।
पुराना पुल
कुछ दूर आगे एक टूटा हुआ पुल दिखाई दिया।
GPS अब भी बंद था।
पीछे से वही आवाज़ आई—
"यहीं रोक दो..."
रवि ने गाड़ी रोक दी।
मुसाफ़िर धीरे-धीरे बाहर निकला।
उसने जेब से एक पुराना सिक्का निकाला और ड्राइवर सीट पर रख दिया।
फिर बिना पीछे देखे कोहरे में गायब हो गया।
कुछ सेकंड बाद...
वहाँ कोई नहीं था।
पुलिस चौकी
डरा हुआ रवि सीधे पास की पुलिस चौकी पहुँचा।
उसने पूरी घटना बताई।
ड्यूटी ऑफिसर ने सिक्का हाथ में लिया।
उनका चेहरा अचानक बदल गया।
उन्होंने धीरे से पूछा—
"यह सिक्का तुम्हें कहाँ मिला?"
रवि ने पूरी बात दोहराई।
ऑफिसर कुछ देर चुप रहे।
फिर रिकॉर्ड रूम से एक पुरानी फाइल लेकर आए।
बीस साल पुरानी दुर्घटना
फाइल में एक सड़क दुर्घटना की रिपोर्ट थी।
करीब बीस साल पहले उसी पुल पर एक टैक्सी नदी में गिर गई थी।
उसमें एक यात्री की मौके पर ही मौत हो गई थी।
जब रवि ने फोटो देखी...
उसकी साँसें रुक गईं।
वह वही व्यक्ति था जो उसकी कैब में बैठा था।
और सबसे डरावनी बात...
उस फोटो में उसने वही सफेद शॉल पहन रखी थी।
कैमरे की रिकॉर्डिंग
रवि की कैब में डैशकैम लगा था।
घर पहुँचकर उसने वीडियो देखा।
वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा था कि वह पूरे रास्ते किसी से बातें कर रहा था।
लेकिन पीछे की सीट पूरी तरह खाली थी।
सिर्फ़ एक जगह...
जब गाड़ी पुल के पास रुकी...
कैमरे में कुछ सेकंड के लिए एक धुंधली आकृति दिखाई दी।
उसने धीरे से कैमरे की तरफ़ देखा...
और मुस्कुरा दी।
फिर गायब हो गई।
सिक्के का रहस्य
अगले दिन रवि उस सिक्के को देखने लगा।
उस पर सन 1989 लिखा था।
लेकिन धातु बिल्कुल नई जैसी चमक रही थी।
उस रात उसने सिक्का दराज़ में रख दिया।
सुबह उठकर देखा...
सिक्का गायब था।
उसकी जगह एक छोटा-सा कागज़ रखा था।
उस पर सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—
"किराया मिल गया... फिर मिलेंगे।"
दूसरी बुकिंग
एक महीने बाद रवि ने फिर से रात में कैब चलानी शुरू की।
रात के ठीक 2:17 बजे...
मोबाइल पर वही नोटिफिकेशन आया।
Pickup Location: Silent Turn
Passenger Name: Last Passenger
इस बार किराए की जगह सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—
Pending
रवि ने बिना एक सेकंड गंवाए मोबाइल बंद कर दिया।
उसने उसी रात तय कर लिया...
अब वह कभी रात में उस रास्ते पर गाड़ी नहीं चलाएगा।
आज भी...
आज भी उस हाईवे पर ट्रक ड्राइवर और टैक्सी चालक एक-दूसरे को एक सलाह ज़रूर देते हैं—
अगर घने कोहरे में कोई अकेला यात्री हाथ देकर गाड़ी रोकने की कोशिश करे...
तो पहले उसके पैरों की तरफ़ ज़रूर देखना।
क्योंकि कहते हैं...
कुछ मुसाफ़िर मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं...
बल्कि किसी और को अपने साथ ले जाने के लिए सफ़र करते हैं।
अगर आपको ऐसी horror story in hindi पसंद आती है, तो ऐसी unexpected stories हमें यही सिखाती हैं कि हर सुनसान सड़क पर मिलने वाला यात्री ज़रूरी नहीं कि इस दुनिया का ही हो।
पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in
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