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बाँस की खेती ऐसे करें पूरी जानकारी
बाँस की खेती का परिचय bans ki kheti
भारत बाँस की प्रजातियों में काफी समृद्ध है | बाँस की खेती में संसाधन के मामले में चीन के बाद भारत का सीन है | भारत में पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिम घाट, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं अंडमान निकोबार द्वीप में काफी मात्रा में बाँस पाये जाते हैं पूर्वोत्तर राज्यों में व्यवसायिक दृष्टिकोण से बाँस उत्पादन, गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है |यहाँ की मिट्टी एवं जल स्तर इस फसल के लिए काफी ...
... लाभदायक है | यहाँ वर्षा औसत स्तर पर अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक है, जो बाँस के लिए आवश्यक है |
बाँस की खेती में तीन से चार महीने में काफी ऊँचाई प्राप्त कर लेता है | इसके बाद सिर्फ शाखा का ही विकास होता है | बाँस वजन में हल्का, लचीला एवं आसानी से फटता है | इसी गुण के कारण प्राकृतिक विपिदा जैसे भूकम्प एवं तूफ़ान वाले इलाके में आवास निर्माण हेतु बाँस आदर्श पदार्थ माना जाता है | बाँस निवास सुरक्षा, जीवन यापनसुरक्षा, परिस्थितिक सुरक्षा एवं खाद सुरक्षा प्रदान करता है |
बाँस की खेती मिट्टी
बाँस का विकास ज्यादातर बलुआही दोमट से लेकर चिकनी मिट्टी, (जो नदी द्वारा बिछाए जाते है) या चट्टानी मिट्टी में अच्छा होता है, पर दलदली मिट्टी में भी इसका विकास देखा गया है | क्ले से क्ले दोमट एवं अम्लीय गुण वाले (पी.एच. 6.00 से 7.50) वाले इलाकों में बाँस के सघन वृक्ष सामान्य तौर पर पाए जाते हैं एवं यह मिट्टी एवं जलवायु बाँस हेतु उत्तम मानी गई है |
विशेष जानकारी – मोती की खेती कैसे करे
बाँस की खेती की तैयारी
साधारणत: बाँस रोपने हेतु खेत की जुताई नहीं की जाती है, परन्तु यह आवश्यक है कि गड्ढे खोदने के पहले कम से कम एक बार मिट्टी पलटने वाले हल एवं दो बार देशी हल से जुताई कर पाटा देकर समतल कर लेना चाहिए |
बाँस की खेती में प्रौध प्रसारण
बाँस का प्रसारण बीज एवं वानस्पतिक दोनों ही विधियों से होता है परन्तु वानस्पतिक विधि से ही साधारणत: पौधे लगाये जाते हैं | इस विधि में कंद एवं कंद के बीट्स रोपण सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है | कंद रोपनी के लिए एक वर्ष पुराने कंद को उपयोग में लिया जाता है | इसके लिए कंद को जड़ के साथ खोदकर निकाला जाता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1 मीटर की हो बीज से पौधशाला में जून-जुलाई माह में बिचड़ा तैयार कर लिया जाता है | 10-15 से.मी. के पौधे को एक वर्ष तक पॉलीथीन बैग में लगाकर रखा जाता है | तदोपरान्त खेतो में लगाया जाता है |
बाँस की खेती में पौध रोपण
बाँस का पौधरोपण मानसून के समय शुरू होते ही उपयुक्त रहता है फिर भी जून से सितम्बर माह उपयुक्त है | रोपण हेतु 60 से.मी. ऊँचाई 60 से.मी. का गड्ढा खोदकर कम्पोस्ट 5 किलो प्रति गड्ढा एवं 50 ग्राम थिमेंट 10 जी मिट्टी के साथ मिला भरकर लें एवं रोपण का कार्य करें | गड्ढे से गड्ढे की दुरी (कतार से कतार) पाँच मीटर एवं पौध से पौध चार मीटर अच्छा माना गया है | इस प्रकार एक हेक्टेयर में पाँच सौ पौधे लगेंगे | पौध रोपण के उपरांत सिंचाई अवश्य करें | ऐसा पाया गया है कि बाँस में पौध रोपण पश्चात् पौधों की मृत्यु दर 15-20 प्रतिशत होता है | अत: प्रतिस्थापना हेतु 20 प्रतिशत छोटा पोधा अलग से रखा जाना चाहिए ताकि उसे प्रतिस्थापित किया जा सके |
बाँस की खेती के लिए उर्वरक
अच्छी फसल हेतु बाँस में नाइट्रोजन एवं पोटाश के रासायनिक उर्वरक का प्रयोग वर्ष में दो से तीन बार करना लाभप्रद होता है | बाँस अत्यधिक उर्वरक की चाहत रखने वाला पौधा है | काफी उपजाऊ मिट्टी में भी लगाया गया बाँस कम समय में सारे पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेता है और उसे अतिरिक्त उर्वरक की आवश्यकता पड़ती है | निम्न सारणी के अनुसार बाँस / उर्वरक की मात्रा प्रति बीट्स के चरों ओर डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर सिंचाई कर दें |
बाँस की खेती के लिए निराई-गुड़ाई
प्रथम वर्ष तीन बार (अक्टूबर, फरवरी एवं मई) एवं द्वीतीय वर्ष दो बार (अक्टूबर एवं मई) निकाई-गुड़ाई आवश्यक है, जिससे खरपतवार से जमीन को साफ रखा जा सकें |
बाँस की खेती में सिंचाई
पौध रोपण के बाद दो साल तक प्रतिवर्ष तीन सिंचाई आवश्यक है | इसके बाद साधारनतया सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है | यह वर्षा पर ही निर्भर करता है |
बाँस की खेती
अन्तर्वर्ती फसल (इंटर क्रॉपिंग)
बाँस के फसल का रोपण से कटाई के बीच की अवधि पाँच साल माना जाता है | पहले तीन वर्षो में अंतवर्ती फसल के रूप में हल्दी, अदरख, मिर्च आदि एवं छाया चाहने सुगन्धित पौधे को लेकर अतिरिक्त लाभ प्राप्त किया जा सकता है | बाँस की नर्सरी से लेकर खेत में प्रतिस्थापन के समय उर्वरक का प्रयोग अत्यन्त आवश्यक है |
बाँस की खेती में कटाई एवं उपज
बाँस का वार्षिक उपज प्रत्येक वर्ष निकलते हुए नए कलम पर निर्भर करता है | कलम तीन से चार वर्ष में परिपक्व होते हैं | अच्छे वातावरण में एक बाँस सामान्यतया एक साल में दस कलम पैदा करता है | अपने तीस वर्ष के जीवन चक्र में यह 300 कलम पैदा करेगा |
व्यावसायिक दृष्टिकोण से बाँस की कटाई पांचवें साल से शुरू होती है | कटाई के प्रथम वर्ष 6 कलम प्रति कलम्प एवं दूसरे वर्ष 7 कलम प्रति कलम प्राप्त होता है और इसी क्रम में बढ़ोतरी पायी जाती है | एक से दो साल पुराने कलम को पुनर्जीवन के लिए छोड़ दिया जाता है | एक कलम का औसत वजन 100 किलो मानते हुए प्रथम वर्ष में उपज 9.6 टन प्रति एकड़ होगा जो नौवें साल में 14.4 टन होगा | बाँस उगाने से समतल क्षेत्र में इसका उपज 5-12 टन प्रति हेक्टेयर, लेकिन वन क्षेत्र में 3-4 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है |
बाँस की खेती में विर्तीय पहलू
इकाई खर्च
एक एकड़ इकाई बाँस रोपाई हेतु पाँच सालों तक 9400 खर्च होता है | खर्च का विवरण निचे तालिका में दी जा रही है |
तालिका 1.
एक एकड़ भूमि पर बाँस लगाने का खर्च
क्र. अवयव इकाई प्रथम वर्ष द्वतीय वर्ष तृतीय वर्ष चतुर्थ वर्ष पंचम वर्ष कुल
रोपण सामग्री 20 प्रतिस्थापन साथ खाद एवं उर्वरक पौधा संरक्षण एक वर्ष में तीन सिंचाई घेराबंदी 200 320 100 1200 960 40 320 100 1200 240 1800 500 2400 960 200 320 100 1200 960
320 100 320 100 320 100
उप कुल 2780 1660 420 420 420 5900 2780
श्रमिक
खेती की तैयारी 250 250 250
गड्ढे को खुदाई एवं भराई, 15 गड्ढे प्रति दिन प्रति मजदूर 500 100 600 500
रोपाई एवं सहारा देना 250 50 300 250
पौधा संरक्षण 100 100 100 100 100 500 100 250
निकाई, गुड़ाई (प्रथम वर्ष-3 एवं द्वतीय वर्ष 2-4 मजदूर दिवश प्रति निकाई गुड़ाई) 250 167 417
छटाई तीसरे वर्ष से 0 0 250 250 250 750 0
मिट्टी कार्य एवं अन्य 100 100 100 100 100 500 100
बाँस की कटाई-छट्ठा एवं सातवाँ वर्ष-10 कार्य दिवश, आठवाँ वर्ष एवं इसके बाद 12 कार्य दिवश प्रति वर्ष
उप कुल 1450 517 450 450 450 3317 1450
विविध व्यव 212 109 44 44 44 451 212
कुल योग 4442 2286 914 914 914 9668 4442
या 4400 2300 900 900 900 9700 4400
बाँस की खेती में आय
बाँस की कटाई साधारणत: छठवे वर्ष और इसके बाद से प्रारम्भ होता है | कच्चे बाँस का बिक्री दर साधारणत: 550 रूपये प्रति टन होता है |
तालिका – 2
बाँस की खेती में रोपनी से उपज एवं आय
वर्ष उपज (मैट्रीक टन में) आय (रूपये में)
छठा सातवाँ आठवाँ नौवाँ एवं आगे के वर्षो में 9.6 11.2 12.8 14.4 5200 6160 7040 7920
व्यवसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बाँस के प्रजातियाँ
बैम्बूसा बालकोआ, बैम्बूसा नूटन्स, डेन्ड्रोकैलेमस स्ट्रिक्टस, बैम्बूसा बैम्बोस, बैम्बूसा टुल्डा, बैम्बूसा वलगेरिस, डेन्ड्रोकैलेमस हेमिलटोनी, डेन्ड्रोकैलेमस एस्पर, डेन्ड्रोकैलेमस गिगनेट्स, गौडा अगस्टीफ़ोलिया |
https://deshkikheti.com/bans-ki-kheti-kaise-kare-hindi/
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